शुक्रवार, 6 मई 2022

मालूम है दिल-ए-माशूक में नहीं रहते 🌺

मालूम है दिल-ए-माशूक में नहीं रहते,
पर कहाँ रहते हैं वो लोग जो कहीं के नहीं रहते।


रहते गर होश-ओ-हवाश में तो भले रहते,
कमबख़त दर-बदर तलाश में नहीं रहते।


किया होता तो बेदखल ही किया होता,
हम कम से कम अब तलक आस में नहीं रहते।


प्यासे थे तो खुद को गहरा खोदा हमने,
मौसम-ए-बरसात के अब हम कयास में नहीं रहते।
                                  -@अखिल 🌺