बुधवार, 28 नवंबर 2018

अपनी नजरों में ना गिरना।


मैं तो कीचड़ हूँ , उछाला जाऊँगा।
तेरी पाक़ीजा पे सवाल जमाना करे,
तू मुझमें उतर के भी चन्दन सा उभरना।
अपनी नजरों में ना गिरना॥

मैं सन्दल में चमक चाँदनी बिखेरूँगा।
तेरी खूबसूरती पे सवाल जमाना करे,
तू मुझमें नहाके भी कमल सा खिलना।
अपनी नजरों में ना गिरना॥

मैं बारिशों में सौंधी महक का निमंत्रण भेजुँगा।
तेरे आकर्षण पे सवाल जमाना करे,
तू संदल में समाधिस्थ बगुले सा निखरना।
अपनी नजरों में ना गिरना॥
                                           - 😊 अखिल 😊 

मेरे गाँव की जुम्ही

मेरे गांव की जुम्हीं ! तुम मेरी प्रेमिका सी खूबसूरत हो..
उसके रुखसार की लाली से ही तो नूर निखरता है तुम्हारा..
उसके होठों से मकरंद चुराकर ही तो मधुमय होती हो तुम..
सितम दौर का देखो,उसे देखना नहीं नसीब मेरे..
तुम्हें देखकर मगर मिरे,चेहरे में चमक,लहजे में खनक आ जाती है..
मेरे गांव की जुम्हीं! हम-तुम मृणमय,प्रेम नहीं..
मैं प्रेम लिये प्रायः आऊँगा पास तुम्हारे..
उसके नूर की झलक पाने....
सुन्दरता की,मधुमयता की,कोमलता की मूरत हो..
मेरे गांव की जुम्हीं! तुम मेरी प्रेमिका सी खूबसूरत हो..
                                                          - अखिल 😘