बुधवार, 28 नवंबर 2018

अपनी नजरों में ना गिरना।


मैं तो कीचड़ हूँ , उछाला जाऊँगा।
तेरी पाक़ीजा पे सवाल जमाना करे,
तू मुझमें उतर के भी चन्दन सा उभरना।
अपनी नजरों में ना गिरना॥

मैं सन्दल में चमक चाँदनी बिखेरूँगा।
तेरी खूबसूरती पे सवाल जमाना करे,
तू मुझमें नहाके भी कमल सा खिलना।
अपनी नजरों में ना गिरना॥

मैं बारिशों में सौंधी महक का निमंत्रण भेजुँगा।
तेरे आकर्षण पे सवाल जमाना करे,
तू संदल में समाधिस्थ बगुले सा निखरना।
अपनी नजरों में ना गिरना॥
                                           - 😊 अखिल 😊 

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