बुधवार, 28 नवंबर 2018

मेरे गाँव की जुम्ही

मेरे गांव की जुम्हीं ! तुम मेरी प्रेमिका सी खूबसूरत हो..
उसके रुखसार की लाली से ही तो नूर निखरता है तुम्हारा..
उसके होठों से मकरंद चुराकर ही तो मधुमय होती हो तुम..
सितम दौर का देखो,उसे देखना नहीं नसीब मेरे..
तुम्हें देखकर मगर मिरे,चेहरे में चमक,लहजे में खनक आ जाती है..
मेरे गांव की जुम्हीं! हम-तुम मृणमय,प्रेम नहीं..
मैं प्रेम लिये प्रायः आऊँगा पास तुम्हारे..
उसके नूर की झलक पाने....
सुन्दरता की,मधुमयता की,कोमलता की मूरत हो..
मेरे गांव की जुम्हीं! तुम मेरी प्रेमिका सी खूबसूरत हो..
                                                          - अखिल 😘

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें