ऋतम्भरा
शुक्रवार, 6 मई 2022
मालूम है दिल-ए-माशूक में नहीं रहते 🌺
मालूम है दिल-ए-माशूक में नहीं रहते,
रहते गर होश-ओ-हवाश में तो भले रहते,
किया होता तो बेदखल ही किया होता,
प्यासे थे तो खुद को गहरा खोदा हमने,
शनिवार, 9 अप्रैल 2022
धड़कनें सुन रही हो ना !
तुम्हें सीने से लगा के पाया कि,
तुम्हारी धड़कनों की लय से मेरी धड़कनें मिल रही हैं।
देह के दायरे के बाहर आत्मा खिल रही है।
तुम भी धड़कनें सुन रही हो ना!
मनुष्य के मनुष्य हो जाने का स्वप्न बुन रही हो ना!
तुम्हें खाने का खयाल भी आए तो अस्तित्व मुझे खा जाए।
सच कहो, मेरे हृदय में प्रेम गुन रही हो ना!🌺👏
- 🌺अखिल🌺
बुधवार, 28 नवंबर 2018
अपनी नजरों में ना गिरना।

मैं तो कीचड़ हूँ , उछाला जाऊँगा।
तेरी पाक़ीजा पे सवाल जमाना करे,
तू मुझमें उतर के भी चन्दन सा उभरना।
अपनी नजरों में ना गिरना॥
मैं सन्दल में चमक चाँदनी बिखेरूँगा।
तेरी खूबसूरती पे सवाल जमाना करे,
तू मुझमें नहाके भी कमल सा खिलना।
अपनी नजरों में ना गिरना॥
मैं बारिशों में सौंधी महक का निमंत्रण भेजुँगा।
तेरे आकर्षण पे सवाल जमाना करे,
तू संदल में समाधिस्थ बगुले सा निखरना।
अपनी नजरों में ना गिरना॥
- 😊 अखिल 😊
मेरे गाँव की जुम्ही
मेरे गांव की जुम्हीं ! तुम मेरी प्रेमिका सी खूबसूरत हो..
उसके रुखसार की लाली से ही तो नूर निखरता है तुम्हारा..
उसके होठों से मकरंद चुराकर ही तो मधुमय होती हो तुम..
सितम दौर का देखो,उसे देखना नहीं नसीब मेरे..
तुम्हें देखकर मगर मिरे,चेहरे में चमक,लहजे में खनक आ जाती है..
मेरे गांव की जुम्हीं! हम-तुम मृणमय,प्रेम नहीं..
मैं प्रेम लिये प्रायः आऊँगा पास तुम्हारे..
उसके नूर की झलक पाने....
सुन्दरता की,मधुमयता की,कोमलता की मूरत हो..
मेरे गांव की जुम्हीं! तुम मेरी प्रेमिका सी खूबसूरत हो..
- अखिल 😘
उसके रुखसार की लाली से ही तो नूर निखरता है तुम्हारा..
उसके होठों से मकरंद चुराकर ही तो मधुमय होती हो तुम..
सितम दौर का देखो,उसे देखना नहीं नसीब मेरे..
तुम्हें देखकर मगर मिरे,चेहरे में चमक,लहजे में खनक आ जाती है..
मेरे गांव की जुम्हीं! हम-तुम मृणमय,प्रेम नहीं..
मैं प्रेम लिये प्रायः आऊँगा पास तुम्हारे..
उसके नूर की झलक पाने....
सुन्दरता की,मधुमयता की,कोमलता की मूरत हो..
मेरे गांव की जुम्हीं! तुम मेरी प्रेमिका सी खूबसूरत हो..
- अखिल 😘
शनिवार, 12 मई 2018
ऋतम्भरा
ऋतम्भरा
तुम्हारे व्यक्तित्व की मिठास से मेरा परिचय हुआ,तो जीवन में आमूलचूल परिवर्तन आये..उस दौर का ज़ायका अब तक मेरी यादों में ताजा हैं..तुम्हारे होने से मेरी रचनात्मकता निखरती है..तुम्हारी संगत की तासीर मेरे मिजाज में झलकती रहेगी हमेशा..
तुम्हारी महक ने मुरझाए चेहरे को पुलक दी है..
सन्नाटे सी जिन्दगी को खनक दी है..
तीरगी के आलम में खुश रहने का हुनर तुम्हारी वजह से सीखा मैंने..उर्ष-ए-वीराँ में खुद को छायादार शज़र सा सींचा मैंने..
तुम्हारी शख्शियत के संक्रमण से,जीवन में नये आयाम का अंकुरण होता है..
जिसकी बदौलत मैं कृतज्ञ हूँ तुम्हारा..
आज मैं अजनबी हूँ तुम्हारे लिये..
पर मैं हमसुख़न हूँ तुम्हारा...
-🌺अखिल🌺
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