शनिवार, 9 अप्रैल 2022

धड़कनें सुन रही हो ना !

तुम्हें सीने से लगा के पाया कि,
तुम्हारी धड़कनों की लय से मेरी धड़कनें मिल रही हैं। 
देह के दायरे के बाहर आत्मा खिल रही है। 
तुम भी धड़कनें सुन रही हो ना!
मनुष्य के मनुष्य हो जाने का स्वप्न बुन रही हो ना!
तुम्हें खाने का खयाल भी आए तो अस्तित्व मुझे खा जाए।
सच कहो, मेरे हृदय में प्रेम गुन रही हो ना!🌺👏
                                      - 🌺अखिल🌺

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