मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

नैसर्गिक सौन्दर्य समारोह।

नैनी झील
 दो मगरमच्छ,एक झील किनारे रवि-रश्मि से पोषित होकर सलिल सौन्दर्य को निहार रहे थे।मदमाती लहरों ने आकर पैर छुए और कलेजे को ठंडा कर गयी। हृदय विराजित स्वयंप्रभा ने सदायौवना,सदानीरा होने का आशीर्वाद दिया तो दिनकर ने भी हीरे-मोती से चमकीले आभूषण पहना दिये हों मानो झील को,शरमायी दुल्हन सी खूबसूरत लग रही थी।

इस नैसर्गिक सौन्दर्य समारोह का निमंत्रण पाकर धड़कनो और धमनियों में ढोलकें सी धुमुक उठी तो सलिल-सुन्दरी की हिलोरों संग ठुमुक जाने का मन हुअा।...
                                      - अखिल।


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