रविवार, 15 जनवरी 2017

तुम्हारे बक्से में फड़फड़ाते हुए मेरे खत ।

मेरे यार डाकिये! मेरे ख़तों को बक्से में छिपाये रखना।
बस,जाये तो इन लफ्जों  की भीनी खुशबु जाये उस तक।
मुझे खबर है देर करेगी आने में,आदत है उसकी।
मैं राख होके भी इंतजार करुँगा,वादा रहा।
उसके आने तक मेरी चिता का अंगार नहीं बुझेगा।
उस दिन रूहानी अस्तित्व लिये,बेहद करीब से..
अपलक जी भरके देखुँगा उसे।
तब प्यार का इक अाँसू उसकी आँख से मेरी राख पे गिरेगा।
मेरी रुह को मुक्ति देगा।
अंगार बुझेगी और शेष रह जायेंगे........
तुम्हारे बक्से में फड़फड़ाते हुऐ मेरे ख़त।......
                                                     - 😳 'अखिल'😳 

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