शनिवार, 12 मई 2018

ऋतम्भरा

                    ऋतम्भरा

तुम्हारे व्यक्तित्व की मिठास से मेरा परिचय हुआ,तो जीवन में आमूलचूल परिवर्तन आये..उस दौर का ज़ायका अब तक मेरी यादों में ताजा हैं..तुम्हारे होने से मेरी रचनात्मकता निखरती है..तुम्हारी संगत की तासीर मेरे मिजाज में झलकती रहेगी हमेशा..

तुम्हारी महक ने मुरझाए चेहरे को पुलक दी है..
सन्नाटे सी जिन्दगी को खनक दी है..
तीरगी के आलम में खुश रहने का हुनर तुम्हारी वजह से सीखा मैंने..उर्ष-ए-वीराँ में खुद को छायादार शज़र सा सींचा मैंने..
तुम्हारी शख्शियत के संक्रमण से,जीवन में नये आयाम का अंकुरण होता है..
जिसकी बदौलत मैं कृतज्ञ हूँ तुम्हारा..
आज मैं अजनबी हूँ तुम्हारे लिये..
पर मैं हमसुख़न हूँ तुम्हारा...

                                         -🌺अखिल🌺

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